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तिमिर

उठो! प्रकाश को ढूँँढ लाऐं कल के  उजालों के लिऐं चलों- मिल के लड़ लें आज कल की खुशहाली के लिऐ बढो- तंगहाली भगानेंं के लिऐ हुँकार भरो मानवता के लिऐ अरे तिमिर तू मुझे न मिटा पाएगा प्रज्वलित प्रज्ञा हर किरण संसार के लिऐ। ममता सिंह ४.४.२०

घरौंदों में रहिये महफूज़ रहिये

वर्तमान परिदृश्य में नाद- --------------- योग की प्रासंगिकता- -------------- आज हम21वीं श.की डगर पर हैं और विज्ञान जीवन का एक तरीका  बन गया है। हम में से अधिकांश लोग विज्ञान को मात्र एक ऐसा जगत मानते हैं जिसमें यंत्र ही यंत्र है। यांत्रिक दृष्टिकोण है और अस्तित्व की हर रोज की संभावनाएं हैं। मुश्किल से ही कोई यह जानने की परेशानी  उठाता है की जीवन का प्रयोजन या जीवन का विज्ञान क्या है ?जबकि यह मनुष्य के सारे क्रियाकलापों का आरंभ और आधार होना चाहिए वैज्ञानिक अनुसंधानों का यह क्षेत्र परम सत्य की खोज विश्व की एकता और दिव्यता कि सर्वव्यापकता की खोज से जुड़ा है और यही वह क्षेत्र है. जिसमें भारत कितनी ही शताब्दियों से विशिष्ट और अग्रणी रहा है ।आधुनिक भौतिक विज्ञान के रूपाकार  ग्रहण करने से पूर्व ही जीवन के इस विज्ञान ने यहाँ पूर्णता प्राप्त कर ली थी और इसे विवेकशील मनुष्य की आत्म प्रकाशन के लिए एक उपयोगी यंत्र के रूप में प्रदान किया गया था और यही योग विज्ञान या योग विद्या जो मनुष्य को उसकी आत्म- जागृति के अंतर्निहित शक्तियों एवं संभावनाओं से परिपूर्ण इस पूरे ब्रह्मांड के प्रति जा...